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Tuesday, 27 December 2011

क्या अन्नाजी (अण्णाजी) उबलता हुआ चावल ही खायेंगे?




Annaji Insisting on JanLokpalBill
MMRDA ground in Mumbai.
शतक 17 में दिल्ली में मुघलोंने अपना साम्राज्य स्थापित किया था। पूरे हिदोस्तान में अलग अलग राजा महाराजा, नवाब, सुलतान थे। मगर सभी परदेशी मुघलों के अंकित थे। नवाब और सुलतान भी परदेशी थे। दख़न में महाराजा शिवाजीने बिजपूर के सुलतानसे कुछ मुलुख तोड़ के स्वराज्य की स्थापना की। तभी दिल्ली में मुघल सम्राट औरंज़ेब का शासन था। शिवाजी को मुघलों का अंकित होना मान्य नही था। शिवाजी महाराज चाहते थे कि, गैर मुल्खसे आये हुये सभी सम्राट, सुलतान, नवाब से हिंदोस्तान को स्वतंत्र्य किया जाय। शुरुवात बिज़पूर के सुलतानसे कुछ भूमी स्वतंत्र कर के हुई। औरंज़ेब काफी चालाक़ और अक्लमंद था। उसे मालूम था की शिवाजी को छूट देनेसे मुघल साम्राज्य बिख़र जायेगा।
Pratapgarh Fort

Chhatrapati Shivaji Maharaj
छत्रपति शिवाजी को पकड़ने के लिये लाख़ कोशिश करने पर भी औरंजेब नाकामयाब रहा तो 1664 में एक बड़ी फौज़ दे के मिर्झा राजा जयसिंह को दख्खन भेजा। मिर्झाने शिवाजी को हैरान किया और उस के बहोत सारे किले (फोर्ट) कब्जे में कर लिये। शिवाजी को आग्रा जाने के लिये मज़बूर किया। शिवाजी आग्रा आने के बाद औरंजेबने मिर्झाको वापस बुला लिया ओर उसकी हत्त्या 2 जुलै 1667 को बु्रहानपूर में कर दी। शिवाजी काफ़ी प्रयास कर के अपने को आज़ाद कर के वापस स्वराज में आ गया। फिर जो किले मुघलों को दिये थे वे वापस लेने का प्रयास शुरू किया। मगर किले वापस लेने में शिवाजी को सफ़लता मिल नही रही थी। ऐसा ही एक असफ़ल प्रयास करने के बाद शिवाजी खाना मिलने हेतु एक झोपड़ी में पहँुचा। झोपड़ी में छत्रपति का स्वागत हुआ और कुछ देर बाद चाव़ल खाने के लिये परोसा। शिवाजी मध्य में हात डालकर चावल खाने लगे। चावल गरम होनेसे शिवाजी का हात जल गया। तो परोसने वालेीअम्माने शिवाजी को मध्य के बजाय बाजूसे चावल खाने की सलाह दी। छत्रपति चाणाक्ष थे। उन्हे अपनी गलती समझने में आ गयी। लक्ष किले वापस लेने का था मगर पहले आजुबाजु का प्रदेश लेना जरुरी है यह उन के समझ में आया। यह नीती अपना के छत्रपति शिवाजी महाराजने सभी किले एक एक कर के फिरसे स्वराज में लाये। लोकपाल गरम चावल का मध्य है। अण्णाजी ने उस पर ही हाथ डाला। उस का नतीज़ा हाथ जलने का ही होगा। माताजी का संदेश जैसा छत्रपति शिवाजी महाराज़ने समझा वैसे ही अण्णा यदि समझे तो सक्षम लोकपाल जनता को मिल सकता है।
Citizen's Charter
जनता को सबसे जादा दिक्कत दिन ब दिन के कार्य में है। उस के लिये सक्षम नागरी संहिता आवश्यक है। पहले नागरी संहिता लाने का प्रयास करना चाहिये। इस के लिये एक पारदर्शी प्रणाली का निर्माण हो। इस प्रणाली का इस्तेमाल कर के सामान्य जन भ्रष्टाचार दुनिया के सामने ला सकते है। अपना अनुभव इंटरनेट के ज़रिये सभी को बता सकते है। कर्मचारी का बर्ताव उस के उच्च अधिकारी के दृष्टिक्षेप में ला सकते है। अधिकारी को कर्मचारी की तहकियात करवाने में बाध्य कर सकती है। नतीजा इंटरनेट के जरिये देख सकती है। यदी अधिकारीने ठीक काम नही किया तो उस के उपर का अधिकारी खुद तहकिकियात कर के दोनो के ख़िलाफ़ कारवाई कर सकता है। इसी तरह इस संहिता के आधारसे केंद्र या राज्य शासन तक तहकिकियात हो सकती है। एक दफ़े यह प्रणाली चल पड़े तो भ्रष्टाचार के मामले पूरे ख़त्म ना भी हुए तो कमसे कम बहुत बड़ी हद तक निपटाये जा सकते है। बड़े भ्रष्टाचार के मामले जनसंविधान प्रणालीसे काबू में नही आयेंगे। उस के लिये अलग तरीका ढँूढना पडेगा।
One of the way to please voters
लालच बड़ी बला है। सत्ता उससे भी बड़ी बला है। लालची मनुष्य पैंसों के लिये कुछ भी कर सकता है। सत्ता लालची मनुष्य को उस में सहायता करती है। इस लिये हर एक व्यक्ति सत्ता पाने के लिये कुछ भी कर सकता है। स्थानिक स्वराज्य संस्थां में चुनाव जीतने के लिये प्रत्याशी करोड़से जादा खर्चा करते है। जाहिर है कि यह पैसा वापस लेने का प्रयत्न होगा और भ्रष्टाचार होगा। इस के लिये उपाय है। हर प्रत्याशी का प्रचार खर्च शासन उठाये। प्रचार का तंत्र निर्माण करे और हर प्रत्याशी को समान संधि दी जाये। इससे प्रत्याशीयों की संख्या बढ़ सकती है। उसे नियंत्रण में लाने के लिये कुछ कानून होने चाहिये। जैसे (R)ight (T)o (R)eject याने RTR, प्रत्याशीयों की निष्ठा याने कम से कम 6 साल तक कोई एक पक्ष के साथ या अपक्ष रहना, 100 फी सदी वोटिंग याने हर वोटर को वोट ड़ालना अनिवार्य करना, प्रत्याशी को जादा से जादा 2 बच्चे होना, प्रत्याशी शासन के नियम पालनेवाला होना, शिक्षा (याने कीे कम से कम 9 वी उत्तीर्ण), अनुभव (याने की 5 से 15 साल का समाज कार्य का अनुभव), इत्यादी. इस मंे औेर भी शर्ते ड़ाल सकते है। यह करने से जनप्रतिनिधी स्वच्छ मिलेंगे। फिरभी शासन के कर्मचारीयों को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिये और कुछ नियम करने पड़ेंगे।
Money

Computer Programme for money Transfer
हड़प कियावाला पैसा बड़ी चलनी नोटों में होता है। पैंसों का रोकड़ व्यवहारसे होता है। इस पर पाबंदी लगा सकते है। चलनी नोट 50 रुपये तक सीमित रखी जाय (वर्तमान में जिसके पास 100, 500 और 1000 के नोट हो तो हर व्यक्तीने सभी नोटोंपर दस्तख़त कर के खुद के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य करें। बैक सभी नोटोंपर खाता क्रमांक ड़ाल के स्वीकार करे और उस की जाँच बाद में कर के व्यक्ती के खाते में जमा करे। इस की जानकारी सक्षम आयकर अधिकारी को देना बैंक के लिये अनिवार्य होगा। यदी यह धन काला हो तो पूरी राशी शासन के खाते में जमा कर दे)। सामान्य व्यक्ती को बैंक में खाता खोलना मुष्किल है। खाते में कम से कम 1 हजार या जादा रक्कम रखने का नियम जो है। यह मुष्किल सुलझाने के लिये शून्य बचत खाता जारी करना होगा। इस नियमसे हर 16 साल के उपर के व्यक्ती को बैंक में खाता खोलना आसान होगा। बैंक खाता होनेसे रोकड़ व्यवहार करीब करीब बंद कर के सिर्फ धनादेश (चेक) द्वारा व्यवहार कर सकते है। यह सुविधा देने के लिये संगणक प्रणाली (कम्प्युटर प्रोग्राम) विकसित करना होगा। ऐसी प्रणाली हो जिस में हर जगह मशीन होगी जो देनेवाले का खाता जाँच के तय करेगी की, खाते में देने के लिये पैसा है या नही। यदी पैसा हो तो फिर दुसरा दस्तख़त कर के लेन-देन पुरी की जायेगी। पैसा जिस की मशीन (यंत्र) हो उसी के खाते  में जमा होगा। जिस के खाते में पैसा जमा होगा उस के खातेसे 1-2 (जो भी तय होगा) फी सदी रक्कम कर के रुप में शासन के खाते में जमा होगी। इस व्यवहार में दो दफ़े अंगुठा लगाना और स्वाक्षरी करना अनिवार्य होगा. यदी दोनो इकठ्ठे किये हो तो वह धनादेश (चेक) ज़ाली माना जायेगा। इस प्रकार रोकड की आवश्यकता ही नही होगी। कुछ मर्यादा तक (याने 100-200 रुपये तक) रोकड़ व्यवहार को मान्यता दे सकते है। बैंक को जो कर जमा होगा उस में तय की हुई रक्कम लेन-देन के लिये दी जाय। बड़ी कीम़त का चलन नही होने से काला पैसा छुपा के रखना असंभव होगा।
जो भी नियम बनाये जाये उन का जारी करने का समय निश्चित किया जाय। और भी उपाय आवश्यक होंगे। सोच के बाद ऐसे उपाय इस में जोड दिये जाय।

1 comment:

Jana said...

Reserve Bank of India has issued directives to all scheduled commercial bank to make available Zero balance account named as Basic Bank Account to every one. The account shall have facility for Debit cum ATM card at no extra charges. Therefore every eligible person can have a bank account in near future. This is the first step towards eradication of corruption in public life. I had suggested this in my article @ http://janahitwadi.blogspot.in/2011/01/new-bank-accounts.html
Now there is a need the citizens press their demand for other bank accounts. Social workers and leaders can take up this issue and succeed.

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