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Saturday, 31 December 2011

क्या अकेला लोकपाल भ्रष्टाचार खत्म करेगा?


मेरा एक भाषण मैंने नीचे दिया है। शायद आप को उपर दिये हुये प्रश्न का उत्तर (ज़बाब) मिल ज़ायेगा।
Power Corrupts
अंग्रेजी में एक कहावत है। "व्यक्ती को भ्रष्ट बनाने का कारण सत्ता है। अमर्याद (असीम) सत्ता व्यक्ती को अमर्याद भ्रष्टाचारी बना सकती है।" कैसा भी कानून बनाये वह भ्रष्टाचार का निर्मुलन कुछ हद तक ही कर सकता है। वक़ील समझते है की, कानून का उपयोग (इस्तेमाल) पक्षकार (मुवक्कील) को बचाने के लिये ही करना है। उसे यदी दोषी पाया तो जुर्मानेसे काम होना चाहिये। शारिरिक सज़ा ना होनी चाहिये। वक़ील कभी भी दोषी को सज़ा दिलवाने के लिये काम नही करता। वह हमेशा अपने पक्षक़ार के हित में ही सोचता है। कोई भी मुक़दमा को 2-4 हप्ते या महिनों में अंज़ाम दिया जा सकता है। मगर वक़ील अपना दिमाग पक्षकार को दोषी साबित ना करने केी पहले कोशिश करता है। उस में समय जितना ज़ादा लगे उतना अपने पक्षकार के हित  में है, ऐसाभी सोचता है। मैं एक चोरी का उदाहरण लेकर मेरे विचार समझाने का प्रयास करता हूँ।

हम सब पहले चोरी नही हो इस के लिये दक्षता लेते है, ना की, चोरी होने के बाद चोर को पकड़ के उसे सज़ा देने की सोचते है। चोरी का काऱन सोचते है। पहला काऱन घर में कीमती चीजों का होना। हम घरने कीमती चीज़ें रखने के बजाय बैंक में लॉकर ले कर रख़ते है। चोर घर में आया भी तो जादा नुकसान न कर पायेगा। उस के बाद चोर घर में आये ही नही इस के लिये मजबूत दिवारें, छत, खिड़कियाँ, दरवाजे बनाते है। इन को तोड़ना चोर के लिये मुष्कील कर देते है। दरवाज़ा धक्का देने से ना खुले इस का इंतज़ाम करते है। अपना घर पूरी तरह से सुरक्षित करने के बाद सुरक्षा रक्षक की सेवा लेते है। अपनी तरफ़ से पूरा इंतज़ाम करने के बाद ही कानून का सह़ाऱा लेते है। सिर्फ क़ानून ही हमारी चोरों से सुरक्षा देगा ऐसा कभी ना किसिने सोचा न पाया।
भ्रष्टाचार के मामले का भी सामना इसी तरहसे करना चाहिये। पहले तो भ्रष्टाचार हो ही नही इस के लिये क़दम उठाने पडेंगे। उस के बाद ऐसी यंत्रणा बनाई जाय जिसमें जनता भ्रष्टाचार का मामला खुले दिलसे, निर्भयतासे उठाये सके। उस के उपर जानकारी प्राप्त कर के सही कदम उठाने का ज़िम्मा उसी यंत्रणा का होना चाहिये। यही यंत्रणा भ्रष्ट सिद्ध (साबित) होने के बाद दोषी क ो सज़ा दे कर भविष्य में वैसा भ्रष्टाचार न होने पाये इस लिये अपनी यंत्रणा में सुधार करें। यह करने के बाद वह यंत्रणा पूरी जानकारी एक सक्षम यंत्रणा को दे दें। यह यंत्रणा लोकपाल हो सकती है। लोकपाल यदी कारवाई से संतुष्ठ होगा तो मामला आगे नही बढ़ेगा। खामी या खामीयाँ हो तो लोकपाल अपने अधिकार में कारवाई कर सकता है। यह ध्यान में रखना चाहिये की ऐसी प्रक्रिया (पद्धती) होनी चाहिये कि, जो व्यक्ती भ्रष्टाचार का मामला दर्ज़ करता है उसे किसी के पास बार बार ना जाना पडे ना की, एक के बाद दूसरे के पास जाना पडे। मामला दर्ज़ करने के बाद उस का बयान ले जा सकता है, सबूत माँगे जा सकते है, मगर न्याय व्यवस्था में जैसे एक न्यालय के बाद उस के उपरवाले न्यायाल में जाना पड़ता है वैसे जाने की आवश्यकता नही होनी चाहिये। पूरी कारवाई वेबसाईट पर रखी जाय और कोई भी उसे देख़ सके। लोकपाल को सभी यंत्रणा पर नज़र रख़ने की क्षमता देनी चाहिये।

Thief Trying to Break in House
Thief Breaks in House
queue in Office
चोरी हो ही ना पाये इस के लिये कदम उठाना सबसे पहले करना चाहिये। आम आदमी को हररोज. कोई ना कोई काम के लिये शासन के या गैर सरकारी  दफ्तर में जाना पडता है। एक उदाहरण लेते है। आम आदमी जब दफ़्तर पहुँता है तो पहले वह मालूम करना चाहता है की, उस का काम किस के पास जानेसे होगा। मगर यह जानकारी मिलेगी इस का कोई विस्वास (भरँवसा) नही होता। फिर कोई क़तार में खड़ा हो ज़ाता है। जब वह खिड़की के पास पहुँचता है तो उसे बताया जाता बै कि, यह काम इधर नही तो कोई और ज़गह होता है। उस और जगह की जानकारी नही दी जाती। फिर वह और जगह ढुंढने लगता है। कोई उसे सही खिडकी दिखाता है। फिर क़तार में खडा होता है। खिड़की के पास जब वह पहँुचता है तो उसे पूछा जाता हे आपने फोटो क्यों नही लगाया? आम आदमी यह कहे की, मेरे पास फोटो है किधर लगाना है इस के बारे में किधर भी नही लिख़ा था इस लिये मेंने गोंद और फोटो साथ में लाया है। आप जिधर कहेंगे उधर मैं अभी लगाता हँू। उसे जगह दिखाया जाती है। वह आदमी जब फोटो चिपकाने की कोशिश करता है तो उसे कहा जाता है कि, और भी कतार में है तो बाजू में जा के फोटो चिपकाओ। बेचारा खिडकी से दूर जा के फोटो चिपकाता है। मगर वह खिडकी के पास नही जा सकता। फिर कतार में खडा हो जाता है। जब फिरसे उस की बारी आ जाती है तो उस को फोटोपर दस्तख़त करने के लिये कहा जाता है। हो सकता है की फोटो और किसी का याने पत्नी का हो तो पूछा जाता है, यह फोटो औरत का है और उसी का दस्तख़त चाहिये। फिर वह घर जाता है और पत्नी से दस्तख़त करवा के कतार में खडा हो जाता है। जब उस की बारी आ जाती है तो पूछा जाता है कि जिस का दस्तख़त है वह किधर है? इस तरह कुछ सेकंद में होने वाले काम के लिये कुछ दिन लगते हैै। और यह मामला इधर ही खत्म नही होता। फोटो के बाद हर प्रमाणपत्र के बारे में ऐसा ही होता है। इस का मतलब है कि, मिनिटों में होने वाले काम के लिये बरसों लग जाते है। शासन के कर्मचारियों का काम भी बढ़ता है। वे भी सोचते है कि, आम आदमी को पूरी जानकारी देने के लिये कोई यंत्रणा होना चाहिये। सोचता जरूर है मगर चाहता नही। वर्तमान यंत्रणा एजैंटों को बढावा देती है और शासन के कर्मचारियों को काला धन कमाने का मौक़ा। इस प्रश्न पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिये। पूरी जानकारी वेबसाईट के ज़रिये जनता के पास पहँुचनी चाहिये। हर दफ़्तर में इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड होना चाहिये। जिस पर उस दफ़्तर में होने वाले काम की सूची होनी चाहिये। सूची में दिये गये काम पर स्पर्श करते ही काम किधर कैसे होता है इस की जानकारी सामने आनी चाहिये। काम करने के लिये लगनेवाले और दस्तों की जानकारी चाहिये। काम करनेवाले कर्मचारी का नाम और बैठने की जगह मालूम होना चाहिये। यह माहिती (जानकारी) ऐसी होनी चाहिये कि कोई भी आम आदमी किसी की सहायता बिना अपनी अर्जी पूरी तरह से संपूर्णतः उचित कर्मचारी को पेश कर सकें। अण्णाजी (अन्नाजी) नागरीको की सनद इस लिये चाहते है। शासन के हर कर्मचारी का काम कार्याल के मुख्य अधिकारी निश्चित कर के लिखीत में देते है। वर्तमान कानून के हिसाबसे हर अधिकारी को कार्यभार सम्हलते ही यह करना अनिर्वाय होता है। तो ऐसी सनद हर दफ़्तर में बनाने में कोई दिक्कत नही होगी। यदी इस पर अमल किया जाय तो ना एजन्ट रहेंगे ना भ्रष्टाचार। कमसे कम नीचले स्तर का भ्रष्टाचार काबू में ला सकते है।
High Currency Notes can be easily carried and concealed
बड़े भ्रष्टाचार रोकड़ व्यवहारसे होते है। ऐसे भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये रोकड़ व्यवहार बंद करना पड़ेगा। यह कर सकते है। चलनसे बड़ी नोटे निकाल कर पूरा आर्थिक व्यवहार धनादेश (चेक) से करना अनिवार्य करना होगा। इस में काफ़ी दिक्कते है। मगर इस पर उपाय भी है। जादा जानकारीइधर मिल सकती है।

1 comment:

Jana said...

Reserve Bank of India has issued directives to all scheduled commercial bank to make available Zero balance account named as Basic Bank Account to every one. The account shall have facility for Debit cum ATM card at no extra charges. Therefore every eligible person can have a bank account in near future. This is the first step towards eradication of corruption in public life. I had suggested this in my article @ http://janahitwadi.blogspot.in/2011/01/new-bank-accounts.html
Now there is a need the citizens press their demand for other bank accounts. Social workers and leaders can take up this issue and succeed.

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