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Thursday, 23 February 2012
Sunday, 12 February 2012
ग्राम प्रशिक्षण संस्थान।
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(Development) शिक्षा का महत्त्व सभी जानते है।
मगर गाँव में रहनेवाली जनता को व्यावहारिक शिक्षण के बारे में कोई प्रयास नज़र नही
आता। गाँव की जनता के लिये प्रयास हो रहे है। बहुत सारी योज़नायें बनी है। मगर इन योज़नाओं
की जानकारी किसी को नही है। भले ही दूरदर्शन का माध्यम शासनने चुना है। मगर कितनी ज़नता
दूरदर्शन देख पाती है? दूसरी बात यह है कि जो ज़ानकारी दूरदर्शन पर दी जाती है वह पूरी
नही होती। उदाहरण के तौर पर निराधारों के लिये पेन्शन योजना है। उस का ब्योरा देते
समय कितनी राशि दी जाती है उसका विवरण नही होता। जब यह राशी किसि के पास पहुँचती है
तब आधी के लगभग होती है। गाँववाले समझते है कि उतनी ही राशि शासनने तय की है। खेत में
आधुनिक तंत्रज्ञानसे ज़ादा उपज़ हो सकती है यह बहोत सारे किसान जानते ही नही। गाँव
के लोगों को बहुत सारी जानकारी नही है। यह जानकारी आसानीसे उन्हे प्राप्त हो जायें।
दूसरी बात सही दाम की। गाँववाले फसल उगाते है, काटते है, वाज़ार में लाते है, मगर उसे
योग्य कीमत नही मिलती। किसानों को बीज़ नही मिलते, खेती की आधुनिक जानकारी नही मिलती।
उपज़ सुरश्रित रख़ने के लिये सुविधा नही है। ऐसे बहोत सारे प्रश्न है। गाँववालों का
प्रशिक्षण अनिवार्य है। शासन इस के लिये ठोस कदम उठाये तो यह हो सकता है। इस के लिये
काफ़ी मेहनत करने की ज़रूरत है। मेरे विचार में यह वास्तव में लाने के लिये कमसे कम
हर तेहसिल में एक प्रशिक्षण केंद्र बनाना अनिवार्य है।Sunday, 5 February 2012
मराठा आरक्षणावरील अक्षेप निराधार!
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| Reservation |
दिनांक 30 जानेवारीच्या
दैनिक सकाळमध्ये माझे मत या मथळ्याखाली श्री. श्रीमंत कोकाटे यानी मांडलेले विचार वाचले.
त्यानी मांडले आहे की, मराठा समाज राजकारणात प्रगत आहे. परंतु त्या मध्ये फक्त 3 टक्के
लोकच आहेत. बाकी 97 टक्के लोक मागासलेलेच आहेत. त्या मुळे मराठा समाजाला आरक्षणाची
आवश्यकता आहे. भलेही राजकारणात आरक्षण न मिळो परंतु, शिक्षण व नोकरीच्या क्षेत्रांत
आरक्षण मिळालेच पाहिजे. त्यानी आपला युक्तिवाद चाणाक्ष पद्धतिने मांडला आहे. परंतु
हा युक्तिवाद घटनाबाह्य आहे.. घटनेमध्ये फक्त वंचिताना आरक्षण देण्याची सोय केली आहे..Wednesday, 1 February 2012
India i.e. Bharat Needs to Face These Challenges:
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| BharatMata |
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